फूल यादों के खिला देती है
रात दीवाना बना देती है
नींद आँखों को सजा देती है
ख्वाब में दिल को जगा देती है
चाँद आँखों में भटकता है अभी
अब भी जंजीर सदा देती है
एक हँसतीं हुई तस्वीर को मैं
देखता हूँ तो रुला देती है
जिंदगी और तो क्या देती है
गम की मियाद बढ़ा देती है.
(मुगन्नी
तबस्सुम)
No comments:
Post a Comment