मंजिले उसकी,मुरादों का नगर उसका है
पाँव मेरे हैं तकाजाये सफर उसका हैं
लौह उसकी हैं कलम उसका,मुकद्दर मेरा
हाथ मेरे हैं दुआओं में असर उसका हैं
उसकी राते मेरे ख्वाबों को जनम देती हैं
जागती आँखों में पैमाने सहर उसका हैं
दिल कि रस्ता हैं शिकस्ता व जुबूँ यादों का
मेहरबां होके वह आ जाए तो घर उसका हैं.
(मुगन्नी तबस्सुम)
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