रंज की जब गुफ्तुगू होने लगी
आप से तुम,तुम से तू होने लगी
मेरी रुसवाई की नौबत आ गई
शोहरत उनकी कुबकू होने लगी
अब के मिल के क्या रंग हो
फिर हमारी जुस्तुजू होने लगी
दाग इतराए हुए फिरते है
शायद उनकी आबरू होने लगी.
(दाग देहलवी)
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