सुब्ह होती है छुपा लो हमको
रात भर चाहने वाले हमको
हम हकीकत है नजर आते है
दास्तानों में छुपा लो हमको
दिल न पा जाये कहीं शब का राज
सुब्ह से पहले उठा लो हमको
हम ज़माने के सताए है बहुत
अपने सीने से लगा लो हमको
वक्त के होंट हमें छु लेंगे
अन कहे बोल है हम गा लो हमको
कल खरीदारों के पहरे होंगे
आज की रात चुरा लो हमको.
(बशीर बद्र)
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