Thursday, 30 August 2012


सुब्ह होती है छुपा लो हमको

रात भर चाहने वाले हमको

हम हकीकत है नजर आते है

दास्तानों में छुपा लो हमको

दिल न पा जाये कहीं शब का राज

सुब्ह से पहले उठा लो हमको

हम ज़माने के सताए है बहुत

अपने सीने से लगा लो हमको

वक्त के होंट हमें छु लेंगे

अन कहे बोल है हम गा लो हमको

कल खरीदारों के पहरे होंगे

आज की रात चुरा लो हमको.

                        (बशीर बद्र)

 

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