Wednesday, 8 August 2012

अब ऐसे ही जिंदगी को गुजारा करेंगे हम

आओ न पास फिर भी पुकारा करेंगे हम

दीवार एक रिवाज की हायल है दर्मियां

अब दूर से ही तुझको निहारा करेंगे हम

तस्वीर एक है जो तसव्वुर में बन गयी

बस रात-दिन उसी का नजारा करेंगे हम

तुझको हम अपनी राह का साथी न कर सके

तुझको अब अपनी आँख का तारा करेंगे हम

तुम ‘हमसफ़र’ को याद करो या न करो

दिल में सजा के तुझको संवारा करेंगे हम.

                                 (बी.शुक्ला ‘हमसफ़र’)

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