खुश रहे या बहुत उदास रहे
जिंदगी तेरे आस-पास रहे
वो नहीं है तो उसकी आस रहे
एक जाये तो एक पास रहे
जब भी कसने लगा उतार दिया
इस बदन पर कई लिबास रहे
घुल गए अपनी बदनसीबी में
वो सितारे जो अपने पास रहे
आज हम सब के साथ खूब हँसे
और फिर देर तक उदास रहे
दोनों एक दूसरे का मुहँ देखे
आईना आईने के पास रहे.
(बशीर बद्र)
No comments:
Post a Comment