दिल में कोई बात है अब कह जाने दे
आसूँ आँख में आये है बह जाने दे
अपने हाल पे छोड़, दिलासा रहने दे
गम ही अच्छा लगता है सह जाने दे
मेरी सोचों पर यों पहरे तो न बिठा
एक खलिश सी दिल में है रह जाने दे
मंजर कुछ तो बदलेगा वीरानी से
एक खस्ता तामीर को अब ढह जाने दे
पिछली शब को उठकर क्यों तू रोता है
बात नहीं कहने की तो मत कह जाने दे.
(मुगन्नी तबस्सुम)
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