Tuesday, 7 August 2012

खातिर से या लिहाज से मैं मान तो गया

झूटी कसम से आपका ईमान तो गया

देखा हैं बुतकदे में जो ऐ शैख कुछ न पूछ

ईमान कि तो ये है कि ईमान तो गया

दिल लेके मुफ्त कहते है कुछ काम का नहीं

उल्टी शिकायते हुई एहसान तो गया

आफ्शा-ए-राजे इश्क में गो जिल्लतें हुई

लेकिन उसे जता तो दिया जान तो गया

होशो-हवासो ताबो-तवॉ दाग जा चुके

अब हम भी जाने वाले है सामान तो गया                                                        

                                    (दाग देहलवी)

No comments:

Post a Comment