कहाँ आँसुओ की ये सौगात होगी
नये लोग होंगे नई बात होगी
मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा
तुम्हारी मुहब्बत अगर साथ होगी
चरागों को आँखों में महफूज रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
परेशां हो तुम भी परेशां हूँ मैं भी
चलो मैकदे में वहीँ बात होगी
चरागों की लौ से सितारों की जौ तक
तुम्हे मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी
जहाँ वादियो में नये फूल आये
हमारी तुम्हारी मुलाकात होगी
सदाओं को अल्फाज मिलने न पाए
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी
मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी
किसी मोड पर फिर मुलाकात होगी.
(बशीर बद्र)
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