Monday, 3 September 2012


ये चिराग बे नजर है ये सितारा बे जुबाँ है

अभी तुमसे मिलता जुलता कोई दूसरा कहाँ है

वही शख्स जिस पे अपने दिलों जाँ निसार कर दूँ

वो अगर खफा नहीं है तो जरुर बदगुमाँ है

कभी पा के तुझको खोना,कभी खो के तुझको पाना

ये जनम जनम का रिश्ता तिरे मिरे दरमियाँ है

मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफर में

वही दुःख भरी जमीं है वही गम का आसमां है

मैं इसी गुमॉ में बरसों बड़ा मुतमइन रहा हूँ

तेरा जिस्म बेतगइयुर मेरा प्यार जाविदाँ है

उन्ही रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे

मुझे रोक रोक पूछा तिरा हमसफ़र कहाँ हैं.

                                (बशीर बद्र) 

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